कोरोना महामारी या एक सीख ? आपने क्या सीखा कोरोना से

Corona Mahamari ya ek seekh: आजकल आप सभी कोरोना महामारी के चलते अपने अपने घरों में हैं, कुछ लोग अपने व्यवसाव पर भी निकलते होंगे , और कुछ लोग वह भी हैं जो मजबूर हैं व्यवसाय होते हुए भी घर में खाली रहकर ही समय निकाल रहे हैं, जो लोग पैसे से सामर्थ हैं,

उनको शायद कोई फर्क नहीं पड़ता 2-3 महीने घर पर खाली रह कर, परन्तु ऐसे भी बहुत लोग हैं जो जिनके पास एक वक्त के दूध का इंतज़ाम भी नहीं हो पा रहा हैं.

आप मिडिया के माध्यम से देख रहे हैं बहुत सी गैर सरकारी संस्थाए लोगो की मदद के लिए भी आगे आयी हैं, और जहाँ तक संभव हो सकता हैं मदद कर भी रही हैं, पर आपने शायद इसपर ध्यान नहीं दिया की आपके इलाके के जो विधायक है, म्युनिसिपल कौंसिलर हैं, या फिर वह नेता जो रोज़ किसी न किसी पार्टी के झंडा ले कर अपना पोस्टर लगवाते थे और मिलते थे की कभी कुछ दिकत हो तो हमसे संपर्क कीजियेगा ऐसे लगभग सभी नेता गायब हैं.

अगर सिर्फ वह लोग जो अपने पोस्टर और दूसरे गैर जरुरी कामो में पैसो को खर्च करते थे जरुरत मंद लोगों की मदद करें और अपने अपने एरिया में ही खाने और दूसरी जरुरत की चीज़ो का इंतज़ाम ऐसे लोगो के लिए करे जिन्हे असल में इन चीज़ो की आवश्यकता हैं , तो हम समझते हैं कोई भूखा तो नहीं सो पायेगा , और इस महामारी से निकलने में एक दूसरे की मदद भी कर पायेगा.

रोज कोई न कोई तस्वीर दिल को झंझोर देती हैं, आप देखते हैं , कोई 1500 किलोमीटर पैदल चल कर अपने गाओ पहुंचना चाहता हैं, कोई अपने बच्चों के लिए एक वक़्त का दूध जुटाने की लिए परेशान हो रहा हैं, गाओ देहात में तो आपको फिर भी लोग मिल जायेंगे जो एक दूसरे की मदद करेंगे , परन्तु शहरों की हालात बहुत ख़राब हैं, यहां कोई किसी की मदद करना ही नहीं चाहता जो चाहते भी हैं, उन तक ये जरुरत मंद लोग पहुंच नहीं सकते.

Corona Mahamari ya ek seekh: ऐसे में कुछ ऐसे भी लोग सामने आ रहे हैं जिन्हे इतना राशन मिल रहा हैं, जितने की उनको आवश्यकता ही नहीं हैं, सरकार का कोई भी मुअइंदा इन सब चीज़ो को नहीं देख पा रहा की सामान जरुरत मंद तक पहुंच भी रहा हैं या नहीं। सरकारी खजाना कुछ उन चीज़ो पर खर्च किया जा रहा हैं, जहां खर्च की जरुरत ही नहीं।

अगर सरकार के नेता जिन्हे लोगो ने विधायक या मुन्सिपल कौंसिलर बनाया या फिर वह नेता जो अपने आप को सरकारी तंत्र का हिस्सा बताते हैं, सिर्फ यही ध्यान दे की जो सामान सरकार जरुरत मंदो के लिए भेज रही हैं, वह कैसे हर जरुरत मंद तक पहुंचाया जाये तो भी स्थिति कुछ काबू की जा सकती हैं.

कुछ देश कैसे बच गए कोरोना के कहर से

सरकार का हर कदम सभी के लिए मदद पंहुचा सके ये संभव नहीं हैं, परन्तु इंसान अगर अपनी इंसानियत के कुछ कदम जरुरत मंदो की मदद के लिए चले तो ज्यादा जल्दी और सही में मदद पंहुचा सकता हैं. आने वाला वक़्त किसी ने देखा तो नहीं परन्तु जो हालात अभी हैं उन्हें देख कर तो लगता हैं अभी एकदम से तो कुछ अच्छा नहीं होने वाला, समय लगेगा जिंदगी को दुबारा पटरी पर वापिस लाने में. यह समय एकजुटता का हैं सभी को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए।

Corona Mahamari ya ek seekh: ज्यादा वक़्त तक सरकार भी मदद नहीं कर पायेगी, तभी कोरोना के इतने ज्यादा मामले होने के बावजूद भी लॉक डाउन में ढील दी जा रही हैं, और देनी भी पड़ेगी क्युकी सरकारी खजाने जो दिन बा दिन खाली हो रहे हैं, और उसपर किसी भी टैक्स की किश्त या दूसरी सरकारी कमाई के सभी जरिये भी बंद हैं.

वैसे ये कोरोना महामारी सभी के लिए कुछ न कुछ सीख दे कर जायेगी , सरकार को इससे सीखना चाहिए की बड़ी बड़ी मुर्तिया लगाने से अच्छा होता हम अपने देश का मेडिकल सिस्टम को दुरुस्त करते , आम लोगों को सीखना चाहिए की कोई भी साथ नहीं देगा, खुद को ही बचना सीखना होगा.

वही पर उन लोगो को भी सीखना चाहिए जो सिर्फ आज में ही जीते हैं, उन सभी लोगो को आर्थिक रूप से सक्षम होना होगा, कम से कम इतना तो होना ही होगा की रोजमर्रा के जरुरी खर्चो के लिए उन्हें किसी पर भी आश्रित न होना पड़े

क्या आप भी हैं आखिरी पीढ़ी? जानिए इस लिंक पर

तो चलिए देश को एकजुट करें , हिन्दू , मुस्लिम से हट कर भारत के बारे में सोचें अपने परिवारों के बारे में सोचें और देश को आगे बढ़ाने में अपनी अपनी भागीदारी दर्ज करते हुए भारत को विश्व शक्ति बनाये और एक अच्छे कल की शुरुवात करें।


Post a Comment

और नया पुराने