सनातन धर्म की रक्षा के लिये ठोस पहल करें सनातन के धर्मगुरु - यति नरसिंहानन्द सरस्वती

 प्रेस विज्ञप्ति

yati narsinghanand sarswati

सनातन धर्म की रक्षा के लिये अकर्मण्यता और असमंजस छोड़कर ठोस पहल करें सनातन के धर्मगुरु-यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज

*******************

श्रीबालाजी योग विज्ञान अनुसंधान आश्रम में योगीराज स्वामी प्रकाशानन्द   जी महाराज तथा योगिनी माँ राजनन्देश्वरी जी के सानिध्य में 9 दिवसीय शिवशक्ति महायज्ञ के लिये आये अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज 

ने आज यज्ञ स्थल से ही हिमाचल से आये दिव्यांग सन्त बालयोगी जी महाराज,यति सत्यदेवानन्द सरस्वती जी व यति शिवानन्द सरस्वती जी के साथ एक प्रेस वार्ता के माध्यम से सनातन धर्म की रक्षा और सनातन वैदिक राष्ट्र के निर्माण हेतु शुक्रताल सहित सम्पूर्ण विश्व के सनातन धर्म के धर्मगुरुओं का आह्वान किया।

प्रेस वार्ता में स्वामी शिवानंद देवतीर्थ,आचार्य अखिल प्रेमानन्द पुरी, चँद्रमा ब्रह्मचारी,भाजपा नेता योगेंद्र वर्मा,शिवसेना के जिलाध्यक्ष बिट्टू सिखेड़ा,हिन्दू स्वाभिमान के उपाध्यक्ष राजू सैनी,रोबिन पाल, पण्डित प्रदीप, पुष्पेंद्र पण्डित,इंद्रपाल सिंह लंकेश तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।



प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि आज सनातन धर्म पर अभूतपूर्व संकट है।

मुसलमानों की बढ़ती हुई भयावह आबादी और हिन्दुओ का घटता हुआ जनसँख्या अनुपात यह बता रहा है कि 2029 में भारत का प्रधानमंत्री मुसलमान होगा।एक बार भारत का प्रधानमंत्री मुसलमान बना तो न तो यह देश लोकतांत्रिक रह जायेगा और न ही धर्मनिरपेक्ष क्योकि यहाँ लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता केवल और केवल हिन्दुओ के कारण है।

ऐसा होने के बाद धरती का यह टुकड़ा भी अरब,ईरान अफगानिस्तान,पाकिस्तान, बांग्लादेश और कश्मीर की तरह हिन्दुओ तथा अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों का कब्रिस्तान मात्र रह जायेगा। 

यहाँ हमारी सारी संपत्ति छीन ली जाएगी और हमारी औरतो को अपहरण व बलात्कार करके मण्डियों में बेचा जाएगा।इसी के साथ अपने मूल के कटकर सनातन धर्म हमेशा के लिये समाप्त हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि सन्तो का सर्वोपरि कर्तव्य धर्म की रक्षा करना है।जो व्यक्ति अधर्म और अन्याय के विरुद्ध खड़ा होकर धर्म की रक्षा नहीं करता,उसे स्वयं को सन्त या सन्यासी कहने का कोई अधिकार नहीं है।

आज की वास्तविकता यह है कि ईसाइयों के हित की रक्षा सदैव चर्च करता है,इस्लाम के हित की रक्षा मस्जिदों से होती है,सिक्खों की आवाज उनके गुरुद्वारे उठाते हैं, बौद्धों के लिये उनके मठ सदैव संघर्ष करते हैं 

परन्तु विगत कई सौ सालों के भयानक अत्याचारों के बाद भी सनातन धर्म के धर्मगुरु कभी भी सनातन धर्म और हिन्दुओ की रक्षा के लिये कुछ भी नहीं करते।

आज जब सभी धर्मों के धर्मगुरु सम्पूर्ण विश्व पर अपने धर्म के कब्जे के लिये लड़ रहे हैं उस समय सनातन धर्म के धर्मगुरु हिन्दुओ को कमजोर ,कायर और अकर्मण्य बनाने के लिये झूठी अहिंसा और झूठे भाईचारे का प्रचार करने में लगे हुए हैं।

सनातन के धर्मगुरुओं के इस व्यवहार के ही कारण आज हिन्दू की स्थिति बहुत बुरी हो चुकी है।आज अंतिम समय है जब सनातन के धर्म गुरुओं को अपने सब प्रकार के भय,लालच,स्वार्थ और अहंकार छोड़कर सनातन धर्म की रक्षा के लिये खड़े हो जाना चाहिये अन्यथा धर्म कभी भी उन्हें क्षमा नहीं करेगा।

उन्होंने सभी धर्मगुरुओं ने निवेदन किया कि आज हिन्दुओ की घटती हुई जनसँख्या सारे विनाश की जड़ है।ऐसे यदि सभी सनातन के धर्मगुरु एक साथ सभी हिन्दुओ से अपनी जनसँख्या बढाकर अपना अस्तित्व बचाने का आह्वान करें तो परिदृश्य बदल सकता है।

इसके लिये सभी सनातन के धर्मगुरुओं को अपने मठो मंदिरों को ऐसे गुरुकुलों में परिवर्तित करना होगा जहाँ से निःशुक्ल धार्मिक रूप के संस्कारवान और बौद्धिक रूप से सक्षम हिन्दू तैयार किये जा सके।

यदि धर्मगुरुओं का समाज इस संकल्प को अपना ले तो सनातन के एक नए युग का आरम्भ हो सकता है अन्यथा सर्वनाश तो सम्मुख आकर खड़ा ही हो गया है।

गुरुकुल निर्माण के महान कार्य के साथ ही सभी सनातन के धर्मगुरु इजरायल की तरह एक सनातन वैदिक राष्ट्र के निर्माण के लिये कार्य करें।अब बिना अपने राष्ट्र के सनातन वैदिक धर्म के अस्तित्व का बचना बहुत मुश्किल है।

प्रेस वार्ता में योगिराज स्वामी प्रकाशानन्द जी महाराज ने यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी का समर्थन करते हुए कहा कि आज हमारी स्थिति वास्तव में भयावह हो चुकी है।

यदि आज हिन्दू समाज नही जागा तो इस्लामिक गुलामी आ कर रहेगी।समाज को जगाने का कार्य सदैव समाज के धर्मगुरुओं का होता है।

अब हिन्दुओ के धर्मगुरुओं को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करके सनातन धर्म की रक्षा और सनातन वैदिक राष्ट्र का निर्माण करना ही चाहिये। 

उन्होंने यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी को साधुवाद देते हुए कहा कि धर्म के लिये किया गया संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता इसीलिये सनातन धर्म की रक्षा के साथ साथ सनातन वैदिक राष्ट्र का निर्माण भी अवश्य होगा।

प्रेस वार्ता में योगिनी माँ राजनन्देश्वरी जी ने कहा कि हर मन्दिर में गुरुकुल स्थापना का यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी का विचार बहुत अच्छा है।इस पर बहुत गम्भीरता के साथ कार्य होना चाहिये।

उन्होंने कहा कि वो भी इस विषय मे बहुत गम्भीर चिंतन करके कुछ ठोस कार्य करना चाहती हैं ताकी आने वाले समय में हमारी पीढियां और धर्म उन्हें दोषी न ठहरा सके।

1 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने