विशेषज्ञ से जानिए कोरोनाकाल में तनाव से किस तरह बचें?

 

कोरोना की दूसरी लहर के बाद से ही लोग तनावग्रस्त अधिक हो रहे हैं। नाउम्मीदी और ठीक न हो पाने के विचार कोरोना मरीजों को और भी कमजोर बनाने लगते हैं। जिन लोगों को अबतक कोरोना नहीं हुआ है, उन्हें यह डर सताता है कि कहीं उन्हें ये हो न जाए। ऐसी स्थिति में जानिए अपने मानसिक स्वास्थ्य को किस तरह से संतुलित रखा जाए। 

इस मुश्किल समय में मानसिक स्वास्थ्य को कैसे संतुलित रखें? 

डॉ सुनील कहते हैं कि तनाव सभी को होता है, फिर चाहे वे मरीज हों या उनके परिजन हों और सभी का तनाव अलग-अलग स्तर का होता है। तनाव से बाहर निकलने के लिए कोरोना से जुड़ी सही जानकारी प्राप्त करना चाहिए, यदि सही जानकारी नहीं होगी तो हम डरेंगे। कोरोना इतना भी खतरनाक नहीं है क्योंकि 80 प्रतिशत लोग इससे घर पर ही ठीक होते हैं, सिर्फ 1 से 2 प्रतिशत लोग मरते हैं। कोरोना के साथ हमें जीने की आदत डालना होगी।

तनाव को इस समय दूर कैसे किया जाए?

डॉ स्मिता बताती हैं कि इस बात पर ध्यान दें कि ज्यादा लोग इस बीमारी से ठीक हो रहे हैं। इस समय खुद को मजबूत बनाएं। मैं हर चीज को कर सकती हूं। सामान्य सावधानियों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। यदि आप सावधानी रखेंगे तो आप खुद से ये महसूस कर सकेंगे कि मैं स्वस्थ रह सकती हूं तो जीवन में असहायता नहीं आएगी तो आपका स्ट्रेस कम रह सकता है। यदि आप अपने भाग्य को अपने हाथ में रखेंगे तो तनाव कम होगा लेकिन आप ऐसा सोच ही नहीं पाएंगे तो तनाव बढ़ेगा। 

क्या कोविडकाल में हाइपरटेंशन बढ़ा है?

डॉ सुनील ने इस सवाल का जवाब देते हुए बताया है कि ऐसा कुछ नहीं है लेकिन यदि लंबे समय तक आप तनाव लेते हैं तो आपको सेकंडरी हाइपरटेंशन हो सकता है लेकिन अभी तक ऐसे कोई मामले नहीं देखे गए हैं कि कोरोना से हाइपरटेंशन बढ़ रहा है पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि हाइपरटेंंशन और स्ट्रेस के बीच कोई संबंध नहीं है। 

आशा है कि आप सभी अपना और अपने परिवार का ध्यान रखने में समर्थ रहे।  

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